नागपुर में शाम-ए-रेख़्ता का शानदार आयोजन

नागपुर में आयोजित शाम-ए-रेख़्ता कार्यक्रम अपेक्षा से अधिक कामयाब हुआ। इसका सबसे अधिक श्रेय श्रोताओं को जाता है। श्रोताओं ने सभी शायरों को ध्यान से सुना। सभी को दाद ओ तहसीन से नवाज़ा गया। बार बार मुकर्रर की आवाज़ें बुलंद हुईं। तीन घंटे तक सभागार वाह वाह और तालियों से गूंजता रहा। 
टीम सागता और इंशाद फाउंडेशन के साझा प्रयत्नों से रेख़्ता फाउंडेशन के तत्वावधान में नागपुर में शनिवार, 24 सितंबर 2022, शाम 5.00 बजे टॅमरिंड हाॅल, चिटनवीस सेंटर, 56 टेंपल रोड, सिविल लाइन्स, नागपुर में आयोजित 'शाम-ए-रेख़्ता' की सदारत प्रतिष्ठित शाइर जनाब ज़फ़र कलीम साहब ने की। मुंबई से पधारे प्रसिद्ध गीतकार एवं शायर देवमणि पाण्डेय ने कामयाब मंच संचालन किया 
नागपुर से मारूफ़ शायर शमशाद 'शाद' और अज़हर हुसैन भी शामिल हुए और ग़ज़लों की शाम को उरूज पर पहुंचाया। मुम्बई, पुणे, दिल्ली तथा देश के अन्य शहरों से प्रतिष्ठित शायरों ने कार्यक्रम को अपनी उपस्थिति से विभूषित किया
शाम-ए-रेख़्ता में शिरकत करने वाले शायरों की प्रस्तुतियों की झलकियां देखिए
1.अर्श सुल्तानपुरी
किसी परिंद की चीख़ों ने संग-बारी की,
सुकूत-ए-शाम का शीशा, बिखर गया मुझ में।

2. रितेश सिंह 'राहिल'
हम अंधेरा कर के ही रौशन हुए,
और हमीं मशअ'ल जला कर फँस गए।

3. आशुतोष मिश्रा 'अज़ल'
देर तक टिकता नहीं है, यूँ भी पानी में ये चेहरा,
सो दे आए पत्थरों को हम, निशानी में ये चेहरा।

4. हर्षल 'ग़ाफ़िल'
न लगाए तो पेशानी भी रूठे तुझसे,
बिंदी तेरी, जैसे उर्दू का नुक़्ता है।

5. अश्वनी मित्तल 'ऐश'
मेरा ग़म जानते हैं सिर्फ़ दो लोग,
आइने में वो आदमी और मैं।

6. सौरभ 'सदफ़'
बहुत ख़ुद्दार होना भी, अना का एक पहलू है,
घड़े का मुँह अगर उल्टा हो, तो पानी नहीं भरता।

7. सोनू पाटिल 'साइब'
हुआ बस वही जिस का डर था।
मैं तेरा किराये का घर था।

8. अनंत नांदुरकर 'ख़लिश
वही सिक्का है लेकिन, दो हैं पहलू ज़िंदगानी के,
किसी को ये हँसाती है, किसी को ये रुलाती है।

9. सिद्धार्थ शांडिल्य
धुँदली हुई यादों को उजालों की तरह रख।
महबूब का ग़म पाओं के छालों की तरह रख।

10. नवीन 'नवा'
मुझसे मिलना हो तो फिर वक़्त कोई शर्त नहीं,
मैं तो शाइर हूँ मेरे बा'द भी मिल सकता हूँ।

11. इस्माईल 'राज़'
मेरी तन्हाई देखेंगे, तो हैरत ही करेंगे लोग।
मोहब्बत छोड़ देंगे या, मोहब्बत ही करेंगे लोग।

12. अज़हर हुसैन
कहानी में, कहानी की कहानी, कौन पढ़ता है।
यहाँ सब लफ़्ज़ पढ़ते हैं मआनी कौन पढ़ता है।

13. शमशाद 'शाद'
वरना आंसू मेरी आँखों में छलक आए थे,
ये तो बे-वक़्त की बारिश मेरे काम आई है।

14. देवमणि पाण्डेय
ख़्वाब का सब़्जा उगेगा दिल के आँगन में ज़रूर,
शर्त ये है आँख में अपनी नमी बाक़ी रहे।

15. ज़फ़र कलीम
देखते हैं सब नज़र आती हुई ऊँचाइयाँ,
कौन देखेगा मुझे बुनियाद के पत्थर में हूँ।
मुख्य अतिथि जाने माने समाजसेवी राजे भोसले और विशेष अतिथि सागता के मैनेजिंग डाइरेक्टर रितेश सक्सेना ने भी श्रोताओं में बैठकर शायरी का लुत्फ़ उठाया।
इस दरमियान सभी शायरों का स्वागत शाल, श्रीफल और स्मृतिचिंह देकर किया गया

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