महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति को साफ करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (28 नवंबर) को एक अहम आदेश जारी किया है। कामठी नगर परिषद चुनाव के परिप्रेक्ष्य में यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया नहीं रोकी जाएगी और मतदान तय समय पर यानी 2 दिसंबर को ही होगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर चुनाव रोकने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरी की जाए।
हालांकि, कामठी के उम्मीदवारों और मतदाताओं के लिए राहत के साथ-साथ एक पेंच भी फंसा हुआ है। सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयोग की ओर से बताया गया कि 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों में चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिनमें से 40 नगर परिषद ऐसे हैं जहां आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक है। चूंकि कामठी नगर परिषद भी इसी श्रेणी में आती है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि यहां चुनाव तो होंगे, लेकिन इसके नतीजे अदालत में लंबित रिट याचिकाओं के अंतिम फैसले पर निर्भर रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर मामले को अब तीन जजों की पीठ को सौंप दिया है और अगली सुनवाई के लिए 21 जनवरी की तारीख तय की है। इसका सीधा अर्थ यह है कि 2 दिसंबर को कामठी की जनता अपने प्रतिनिधियों को चुन तो लेगी, लेकिन उनकी जीत और पद पर बने रहना सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसले के अधीन होगा। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन स्थानीय निकायों में अभी चुनाव अधिसूचना जारी नहीं हुई है, वहां 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण की घोषणा न की जाए। इस फैसले से कामठी में चुनावी सरगर्मियां तो जारी रहेंगी, लेकिन जीतने वाले उम्मीदवारों के सिर पर अनिश्चितता की तलवार 21 जनवरी या उसके बाद आने वाले अंतिम फैसले तक लटकी रहेगी।

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