मध्य भारत टाइम्स
कामठी | २५ फरवरी २०२६:
त्योहारों के मद्देनजर कामठी में अतिक्रमण विरोधी अभियान को एक महीने के लिए स्थगित किए जाने के प्रशासनिक आदेश का समाजवादी पार्टी (सपा) की स्थानीय इकाई ने स्वागत किया है। हालांकि, इस राहत के बीच सपा नेताओं ने कार्रवाई की मंशा और भविष्य की अनिश्चितता को लेकर गंभीर चिंताएँ और आशंकाएँ भी व्यक्त की हैं।
"क्या ईद के बाद फिर उजाड़ा जाएगा आशियाना?"
मध्य भारत टाइम्स से विशेष बातचीत के दौरान समाजवादी पार्टी के शहर अध्यक्ष मोहम्मद तनवीर शोहरत ने प्रशासन के इस कदम पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या रमजान खत्म होते ही यह कार्रवाई फिर से शुरू कर दी जाएगी? उन्होंने आशंका जताई कि बिना किसी स्थायी समाधान के यह राहत केवल अस्थायी है। शोहरत ने मांग की कि प्रशासन को "बीच का रास्ता" निकालना चाहिए ताकि गरीबों का व्यापार भी चलता रहे और शहर की व्यवस्था भी बनी रहे।
'नूरा कुश्ती' और 'राजनीति' का शिकार होते गरीब?
सपा महाराष्ट्र प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य तसनीम फैसल ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल किया की कहीं ये 'नूरा कुश्ती' तो नहीं। उन्होंने तीखा सवाल पूछा कि क्या वे गरीब फेरीवाले और हाथ ठेले वाले, जिनकी दुकानें अतिक्रमण के नाम पर हटाई गईं, कहीं किसी गहरी राजनीति का शिकार तो नहीं हो रहे? फैसल के अनुसार, केवल त्योहारों पर छूट देना समस्या का हल नहीं है, बल्कि यह गरीबों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ हो सकता है।
स्थायी समाधान की मांग
समाजवादी पार्टी के युवा नेता सूफी अजहर आजमी ने प्रशासनिक ढिलाई पर कटाक्ष करते हुए कहा, "क्या हमें राहत के लिए साल के ३६५ दिन रमजान के महीने का इंतजार करना होगा?" उन्होंने चिंता व्यक्त की कि ईद के बाद कार्रवाई दोबारा शुरू होने से मामला और भी पेचीदा हो जाएगा। तीनों नेताओं ने एक सुर में कहा कि प्रशासन को इस मसले का पूर्ण और स्थायी हल (जैसे कि हॉकर जोन का क्रियान्वयन) निकालना चाहिए, अन्यथा यह केवल मामला सुलझाने के बजाय उसे लंबा खींचना होगा।
नगर परिषद द्वारा बुलाई गई आगामी बैठकों और प्रस्तावित नीतियों पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं कि क्या वास्तव में कोई ठोस विकल्प सामने आता है या यह केवल त्योहारों तक की सीमित राहत है।

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